Sunday, December 4, 2011

तुम मेरे सच्चे साथी हो --



तुम
बिना कोई शिकायत के चुपचाप
मेरे पास बरसों से आ कर बैठ जाते हो ..
मेरे अन्तरंग समय में
मुझसे बहुत बतियाते हो
तुम मेरे सच्चे साथी हो |

भावनाओं के हर भंवर में
लहरों के उतार चढाव संग
मेरे सुख दुःख के साथ ही
तुम भी बहे  जाते हो|
तुम मेरे सच्चे साथी हो|

छोड़ गए जो तन्हा मुझको
दुःख भरे मेरे तन्हा पल में
मन की ताकत बन जाते हो तुम
तुम मेरे सच्चे साथी हो |

कागज़ की श्वेत चादर पर
सफर में संग उड़े जाते हो
आंशुवो को नीलिमा में ढाल
भावनाओं के महल बनाते हो ..
तुम मेरे सच्चे साथी हो|

जो बात किसी से कह ना पाऊं
वो तुम समझ ही जाते हो
मुझे छोड़  गया निर्मोही
बन उसका तुम विद्रोही
मेरा साथ निभा जाते हो
तुम मेरे सच्चे साथी हो  .. सेवा में – “ मेरी कलम “

४-१२-२०११   १५ :५१

30 comments:

  1. wah !!! bahut sundar

    www.poeticprakash.com

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  2. बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  3. आपकी भावपूर्ण प्रस्तुति मन को भाव विभोर
    कर रही है.आपकी कलम कमाल की सेवादार
    है नूतन जी.शब्दों और भावों की प्रस्तुति
    लाजबाब है.अनुपम प्रस्तुति के लिए बहुत
    बहुत आभार.

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  4. बेहद खुबसूरत लिखा है |

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  5. सच्चे साथी के सारे गुण समेटे हुए हैं आपकी कलम!

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  6. वाह...तो कलम ही आपकी वह साथी है,सुंदर शब्द रचना और भाव समर्पित किये हैं अपने...यूँही लिखती रहे आपकी कलम !

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  7. नितांत अकेलेपन में भी तुमने मुझे आवाज़ दी है
    अपने होने का एहसास दिया है
    मुझे मुझसे मिलाया है
    - सत्य की पहचान दी है
    मृतक होने से बचाया है ....

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  8. कागज़ की श्वेत चादर पर
    सफर में संग उड़े जाते हो
    आंशुवो को नीलिमा में ढाल
    भावनाओं के महल बनाते हो ..
    तुम मेरे सच्चे साथी हो|

    सही कहा है ...सुन्दर अभिव्यक्ति

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  9. जो बात किसी से कह ना पाऊं
    वो तुम समझ ही जाते हो
    मुझे छोड़ गया निर्मोही
    बन उसका तुम विद्रोही
    मेरा साथ निभा जाते हो
    तुम मेरे सच्चे साथी हो..... बहुत ही खुबसूरत और कोमल भावो की अभिवयक्ति.....

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  10. सुन्दर प्रस्तुति ||

    बधाई ||

    http://terahsatrah.blogspot.com

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  11. वाह! कलम का साथ इतने आयाम लिए!

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  12. लेखन अकेलेपन में साथ देता है, सुन्दर रचना।

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  13. खूबसूरत पंक्तियां .सुन्दर भाव...अच्‍छे शब्‍द संयोजन के साथ सशक्‍त अभिव्‍यक्ति।

    संजय भास्कर
    आदत....मुस्कुराने की
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  14. कलम एक सच्चा साथी ... सुंदर प्रस्तुति

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  15. वाह ...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  16. सुन्दर भावयुक्त रचना...
    सादर

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  17. लिखने वाले से अगर कलम का साथ छूट जाये .....तो उसका जीवन समाप्त ही है

    बहुत उम्दा शब्दों में लिखी गई मन की अभिव्यक्ति

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  18. बहुत सुन्दर......शानदार अभिव्यक्ति|

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  19. nutan ji bahut hi sundarta se ek sacche sathi k gun ko dhal diya aapki kalam ne......badhai

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  20. Beautiful expression Nutan ji.

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  21. sach kaha....is jaisa saccha saathi kahin aabhasi duniyan me bhi dhoondhne se na milega....aur aabhasi duniya se rishta bhi isi ko mukhiya bana kar kayam kiya ja sakta hai. :)
    sunder kriti.

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  22. छोड़ गए जो तन्हा मुझको
    दुःख भरे मेरे तन्हा पल में
    मन की ताकत बन जाते हो तुम
    तुम मेरे सच्चे साथी हो |

    Shandar Prastuti.

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  23. बहुत सुंदर...कलम जैसा सच्चा और अहसासों को समझने वाला साथी कहाँ मिलेगा...

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  24. जो बात किसी से कह ना पाऊं
    वो तुम समझ ही जाते हो
    मुझे छोड़ गया निर्मोही
    बन उसका तुम विद्रोही
    मेरा साथ निभा जाते हो
    तुम मेरे सच्चे साथी हो

    vah bahut sundar

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  25. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने! बधाई!

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  26. डॉ० गैरोला अच्छी कविता के लिए आपको बधाई और शुभकामनाएं |

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