Tuesday, July 16, 2013

समुन्दर किनारे, एक अनजाना


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नारियल के पेड़ के नीचे

समुद्री रेत पर

घोंघों संग

बीन रही थी कुछ शंख आकार

और कभी कभी ले लेती थी कोई क्लिक

जब  

सूरज की रौशनी मे

सागर सी अथाह भारी आवाज में

वह मछुवारा बोला

न खींचो तस्वीर मेरी

आपकी सभी तस्वीरें काली पड़ जाएंगी|……..

हँस पड़ी थी मैं पर कुछ न बोला

बस मुश्किल से दो पल, चार कदम चले थे साथ

और तेज क़दमों से मैंने रुख बदल लिया था  

दूर दूर मीलों दूर

पहाड़ों की ओर अपने गाँव को……

वर्षों पहले 

छोड़ आई थी सब कुछ उस तट पर

उस अजनबी काले आदमी को, वो नारियल के पेड़

वो रेत वो समुद्र, नाविक और नौकाएं ……

पर साथ आ गयी थी मेरे, अनजाने में ही

उन सब चीजों की यादें और एक निश्छल हँसी

किन्तु एक ऐसी टीस

जिसने चुपके से

इन सबके बीच

अपनी जगह बना ली थी

जी रही है मेरे भीतर  .................

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मानवीय भावनाएं चमड़ी के रंग से कहीं ऊपर होती है|  ---- ~nutan~


 

17 comments:

  1. बहुत सुन्दर भाव....
    यादों की मीठी टीस.......

    अनु

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  2. बहुत सुंदर, शुभकामनाये

    यहाँ भी पधारे
    दिल चाहता है
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_971.html

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  3. यादों के साथ आई टीस...
    मानवीयता की पहचान!

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  4. बेहद सुन्दर प्रस्तुतीकरण ....!!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार (17-07-2013) को में” उफ़ ये बारिश और पुरसूकून जिंदगी ..........बुधवारीय चर्चा १३७५ !! चर्चा मंच पर भी होगी!
    सादर...!

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  5. कोई कोई बात किसी व्यक्तिि की जहन में घर कर जाती है ।
    सुंदर ।

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  6. यादिं की टीस फिर मुखरित होगई..

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  7. किन्तु एक ऐसी टीस

    जिसने चुपके से

    इन सबके बीच

    अपनी जगह बना ली थी

    जी रही है मेरे भीतर ................

    बहुत ही भावमय रचना.

    रामराम.

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  8. बहुत सुंदर, शुभकामनाये
    यहाँ भी पधारे
    http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

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  9. आशा बनाए रखें ..
    शुभकामनायें !

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  10. तस्वीरें काली पड़ती हैं,
    कोई स्मृति धूप दिखा दो,
    बन्द पड़ी एकल कुढ़ती हैं,
    पुनः उन्हें अनुरूप बना दो।

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  11. वाह... उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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  12. ''मानवीय भावनाएं चमड़ी के रंग से कहीं ऊपर होती हैं .''..यही एक पंक्ति आपकी कविता के भाव स्पष्ट करती है ..जिससे आप विचलित हुईं .....और शायद इस कविता का जन्म भी ..... अच्छी कविता ...!!

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  13. सुंदर प्रस्तुति ।।।

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  14. उन सब चीजों की यादें और एक निश्छल हँसी
    किन्तु एक ऐसी टीस.....
    aakhir hum sab insaan hi to hain....

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  15. स्मृतियों का भावपूर्ण कैनवाश
    बहुत गहन और सुंदर अनुभूति
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    सादर

    आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी पधारें भी सम्मलित हों
    केक्ट्स में तभी तो खिलेंगे--------

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