जीती रही जन्म जन्म, पुनश्च- मरती रही, मर मर जीती रही पुनः, चलता रहा सृष्टिक्रम, अंतविहीन पुनरावृत्ति क्रमशः ~~~और यही मेरी कहानी Nutan
Thursday, August 30, 2012
Friday, August 3, 2012
वह आदमी और उसका साथ --- नूतन
Wednesday, August 1, 2012
पहला स्पर्श छुईमुइ सा
Wednesday, July 18, 2012
My clicks My Photos - सुबह बगिया के सैर
| आज सुबह ७:१५ से ७:४५ (17/8/2012 )तक मैंने सैर की -- और अपने साथियों की तस्वीर खींच ली | आज चंद लम्हों में समेटा दुनियाँ जहां का प्यार मेरी बगिया की गिलहरी चिड़िया चीं चीं चहकती मुझसे बेपरवाह रहती मेरे इर्दगिर्द टहलती | और दीवार पर मेरे समान्तर घूमते रहते एक परिवार के नेवले आवाज लगाते और कहते हम है साथी सैर के ज़रा इधर भी देख ले | मैंने आव देखा न ताव ..तुरंत उन्हें अपने कैमरे से पकड़ लिया … |
सभी फोटो मेरी खींची, मेरी पर्सनल फोटो हैं…
Wednesday, July 4, 2012
बुलबुला हुआ मन - नूतन
Saturday, May 26, 2012
तुमसे आखिरी विनती - डॉ नूतन गैरोला
देखो न …..अभी मुझमे साँसों का आना जाना चल रहा है……जिंदगी के जैसे अभी कुछ लम्हें बचे हुवे है ….. आस का पंछी अभी तक पिंजरे में ठहरा है …. सुबह पर अब सांझ का पहरा है …. और सांझ की इस बेला पर याद आने लगीं है ..वो धुंधली परछाइयाँ ....जब हम संग संग रोये थे…. और इक दूजे के पौंछ आंसू खिलखिला कर हँस दिए थे .. साथ था न तुम्हारा मेरा, तो मलाल किस गम का … लेकिन विधाता को क्या मंजूर था ..छोड़ दी थी डोर उसने मेरी जिंदगी की पतंग की .. तुमसे दूर किसी और आसमां पर जा कर फडफडाती रही जिंदगी .. हवाओं में लहराती रही … बहती रही उधर जिधर बहाती रही …क्षितिज पर चटख रंगों वाली सुनहली अकेली पतंग .. कई हाथों को लुभाती रही … इतर हाथों से फिसलती रही ....डगमगाती रही, पर बढती रही .... तब तक जब तक वह हवाओं की प्रचंडता से टूट कर छिन्न भिन्न न हो जाये या कि बारिश में गल कर टपक ना जाये .. देखो न सिन्दूरी सांझ भी ढलने को है और रौशनी भी गुम होने को है बस तुमसे आखिरी बात …
शाम ढल रही है
पिंजरे में पंछी व्याकुल है
लौ भभक के जल रही है|
सागर पर लहरे ढह रही है
और
रात दस्तक दे रही है
पर अभी
उजाले का धुंधलका बाकी है
तेरे इंतजारी में रौशनी ठहरी सी है
तुझे रौशनी की किरणें छू जाएँ
तू आ जा |
….…डॉ नूतन गैरोला