Monday, March 26, 2012

मुक्ति बंधन - नूतन


   adam-and-eve

सुनो आदम!
युगों से बंधी बेड़ियों से
बंधन मुक्ति के लिए मैंने
जब भी आवाज उठायी ..
अवतित इच्छा को जान
तुने नजरें चुरायी
या भोहें तान कर कह दिया 
तुम्हें बाँधा ही है किसने ..
रोष में आ कर
कर दिया मुझे आजाद
और
मुक्ति का शिकंजा कसने लगे |
मुझे रंचभर भी न भाया तुम्हारा ये द्वैत रूप
तब अंतस में मेरा प्रतिरोध जारी रहा|

जिस दिन तुमने अपनी हव्वा को
प्रेम से स्नेहालिंगन में भर  
उसके
कानों में फुसफुसा कर कहा
तुम्हारी आजादी से भी मुझे बहुत प्यार है
उस दिन से मैंने बाँध लिया
खुद को तुम्हारे बनाएँ कुलकान के बंधनों में
और इन बंधनों में मिलने लगी है मुझको
सुकून भरी आजादी |



                           …. ..नूतन  २६ / ३ / २०१२ ..१:३० a:m
..



 


28 comments:

  1. मुक्ति का शिकंजा ...
    बहुत सुंदर

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  2. बंधनों में मुक्त होने का अनुभव, अति विशेष है..

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  3. badan-yukt azadi ..waah..reminds me of ' Man is born free, but everywhere in chains'~Jean Jacob Roussou the gr8 French philosopher

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  4. बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन सटीक रचना,......


    काव्यान्जलि ...: अभिनन्दन पत्र............ ५० वीं पोस्ट.

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  5. वाह बन्धन से मुक्ति से फिर बन्धन्………सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  6. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  7. बेहतरीन रचना. कमाल की अभिव्यक्ति.

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  8. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है।
    चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्टस पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं....
    आपकी एक टिप्‍पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  9. मुक्ति का शिकंजा... आजादी का सुकून....
    सुंदर बिम्ब प्रयोग... सार्थक रचना...

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  10. वाह: बंधन में भी मुक्ति का अहसास..बहुत सुन्दर..

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  11. भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

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  12. बेहतरीन भावव्यक्ति....

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  13. वाह! इस बंधन में भी मुक्ति का आनंद...बहुत सुंदर रचना..आभार..

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  14. aap bahut achha likhti hain didi ji.....

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  15. babut hi khubsurat likha hai...
    hamesha se hi esa hota aaya hai..

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  16. babut hi khubsurat likha hai...
    hamesha se hi esa hota aaya hai..

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  17. प्यारभरे बंधन में भी मुक्ति का अहसास होता है....
    बहुत -बहुत सुन्दर रचना...

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  18. मुक्ति दरअसल बंधन मुक्त करने में ही है ... प्रेम के कच्चे धागे के बंधन पूर्ण मुक्त करके भी जुड़े रहते हैं ... भाव पूर्ण रचना ...

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  19. हम्मम्मम निर्मल प्रेम ही तो है सच्छी आज़ादी....है ना...??

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  20. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  21. अदम-हौव्वा के माद्ध्यम से ज़बरदस्त अभिव्यक्ति.

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  22. bahut sundar bhaav bas is rachna ko ek hi shabd dungi aajaad bandhan.

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  23. सोचने को विवश करती है आपकी अनुपम प्रस्तुति.
    आदम हव्वा की कहानी पुरानी होकर भी नई लगती है.

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