Wednesday, August 1, 2012

पहला स्पर्श छुईमुइ सा



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एक हल्की छुवन

जैसे किसी ने मयूरपंख से छु कर

प्रेम के अनजान सुप्त समुन्दर में

लहरों को जगा दिया हो …

.

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अनुभूतियां तरंगित हुवी

लाज से वह सिमट गयी …

माथे पे बूंदें

शबनम सी घबरा के निखर गयी …

गालों पे

सुर्ख गुलाब शरमा के उभर आये ..

चितचोर की झलक पे

पलकें झुकी जब उठ न पाए …

कहने को तो जाने क्या कुछ बहुत न था

आवाज बंद थी होंठ लरजाये…

अंग अंग बोझिल हुआ

मदभरा शुरूर छाये …..

.

.

यह पहला स्पर्श था सावन का..

बूंदों की रिमझिम पर

छुईमुई सी वह लजा जाए |… ....

.

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डॉ नूतन गैरोला .. ८/१/२०१२,,, ८:१६ सुबह …….मेरी नीजि खींची तस्वीर … घर के आंगन में छुईमुई पे जब फूल खिला तो मैं तस्वीर लिए बिना न रह सकी  .. तस्वीर भी आज ही की  खींची हुई …

9 comments:

  1. वाह.................
    फूल से कोमल विचार.....
    बहुत सुन्दर नूतन जी...

    अनु

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  2. छुईमुई को छूते ही भीतर कितना कुछ घट गया...बहुत सुंदर भाव और चित्र भी,आपका आंगन बहुत मोहक है !

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  3. बेहद खूबसूरत भाव और तस्वीर भी

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  4. भावमय करती प्रस्‍तुति ...

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  5. सुन्दर रचना.....

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  6. यह पहला स्पर्श था सावन का..
    बूंदों की रिमझिम पर
    छुईमुई सी वह लजा जाए,,,,,

    बहुत बढ़िया नूतन जी,,,,बधाई,,,
    रक्षाबँधन की हार्दिक शुभकामनाए,,,
    RECENT POST ...: रक्षा का बंधन,,,,

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    श्रावणी पर्व और रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    श्रावणी पर्व और रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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